गार्गी


जहिना वैदिक काल में लोपामुद्रा,घोषा ,शची,काक्षावृति,पौलोमी आदिक महत्व अछि तहिना ,उपिषदकाल में गार्गी ,मैत्रयी के स्थान अछि ।
महाभारत सँ पचास शाल वाद ,जखनि हस्तिनापुरक राजगदी पर महराज जनमेजय विराजमान छलाह ,तखैन मानल जाइत अछि ।
ओहि समय मिथिलाक राजगदी पर जनक महावशी विराजमान छलाह ।(जनक एकटा पद छियैक ,जेकरा मिथिलाक राजा सब सुशोभित करैत अयला अछि ।
वृहदारण्यकोपनिषद 36, 38, में गार्गी तथा याज्ञवल्य्क आध्यात्म संवाद ,भेटैत अछि ।
गार्गी विषय में विशेष साक्ष शास्त्र में नै रहलाक कारण ,सदिखन विद्वानक बिच मतभिन्नता बनल रहल। हिनक जन्मस्थान . व्यावहारिक जीवन ,सबटा प्रश्न अछि ,
किंतु एतबाटा निश्चितः जे ओ मिथिले में शास्त्रार्थ केने छलि ,ताहि कारण मानल गेल जे ओ मिथिलेक छलिह ।

-रूबी झा

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